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ग़ज़ल

चराग़ों को, मुँडेरो पे सजाया जा रहा है,
फ़िज़ा की तीरगी को, यूँ मिटाया जा रहा है।…………………………………………………….

बकलम खुद
डॉ. शगुफ़्ता नाज़
(असिस्टेंट प्रोफेसर)
अँग्रेज़ी विभाग, एम.डी.डी.एम. कॉलेज
बी.आर.अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार। … Continue readingग़ज़ल

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