दुआ (Prayer)

परेशानी है कुछ ज़्यादा मुनासिब हो तो कम कर दे,
मेरे मौला गुज़ारिश है ज़रा नज़र ए करम कर दे।
 
वबा जो आज फैली है क़यामत जैसे सर पे है,
मुसीबत में जो बंदे हैं ज़रा उन पे रहम कर दे।
 
सभी हमदर्द बन जायें ज़रूरत सब को सब की है,
हर इक इंसान के दिल को तू इक दैरो हरम कर दे।
 
करें मिल कर मदद सब की इक ऐसी सोच दे सब को,
बंटे हैं जो भी मैं-तू में उन्हें आपस में ज़म कर दे।
 
तू अपने इक इशारे से घटा घनघोर बरसा के,
मेरी क़िस्मत के सहरा में बसी ख़ुश्की को नम कर दे।
 
(Poet: जौनी फ़ौस्टर, अलीगढ़)
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