हौसला और उम्मीद

हौसला उम्मीद अपने साथ रख,
नाउम्मीदी की हटा के रात रख।
 
हो नतीजा चाहे फिर अच्छा बुरा,
बात जो सच्ची लगे वो बात रख।
 
जिसका मकसद हो दिलों में दूरियां,
दूर खु़द से ऐसे सब जज़्बात रख।
 
मेल-जोल रस्म ओ राह मोहब्बतें,
साज़गार हर तरह हालात रख।
 
ज़िंदगी जीयें ख़ुशी के साथ सब,
इस तरह बना के कायनात रख।
 
जो भी देखे वो मुरीद हो रहे,
अपनी शख़्सियत में तिलिस्मात रख।
 
देखना इंक़लाब आयेगा,
हाथ में कभी क़लम दवात रख।
 
(Poet:  जौनी फौ़स्टर, AMU)
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