सकारात्मकता

अक्सर हमारी बात पे हंगाम हो गया,
हालांकि उस से ये हुआ कि काम हो गया।
इस कैफ़ियत को क्या कहेंगे आप बोलिए,
ज़ख्मों में टीस उठते ही आराम हो गया।
घर में रहा था क़ैद तो ख़ामोश थे सभी,
निकला हूं अरसे बाद तो कोहराम हो गया।
ये ही है अस्ल ज़िन्दगी ये ही है कड़वा सच,
आग़ाज़ कुछ हुआ नहीं अंजाम हो गया।
फैंका है जब भी आपने मेरी तरफ़ कोई,
पत्थर वही मेरे लिए ईनाम हो गया।
(जौनी फ़ौस्टर अलीगढ़)
Share to:

Leave a Reply