बचपन

पगडंडी रस्ता आवारा मिल जाए,
खोया बचपन काश दोबारा मिल जाए।
जिसकी धुन में सारे पागल होते थे,
बजता गलियों में इकतारा मिल जाए।
छत पे खाट खटोले फिर से बिछ जायें,
रोज़ टूटने वाला तारा मिल जाए।
मीठा पानी सौ बीमारी सौंप गया,
बंबे का कुछ पानी खारा मिल जाए।
अम्मी अब्बू की गोदों में फिर बैठें,
बाग़ बग़ीचा घर चौबारा मिल जाए।
उंगली थामे दूर बहुत हो आते थे,
फिर से वो ही पाक सहारा मिल जाए।
तितली भंवरे फूल परिंदे जुगनू भी,
जन्नत जैसा एक नज़ारा मिल जाए।
(🌻 जौनी फ़ौस्टर, AMU🌻)
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