अंदाज बदल जाएगा

ये मैंने कब सोचा था, ऐसा भी हो जाएगा,
जीवन की हर शह का, अंदाज बदल जाएगा !!!

किसान किसानी छोड़ेगा, गरीब दो रोटी को दोड़ेगा
बुनकर तन पर कपड़ा भी नही पाएगा,
मज़दूर अपने घर का सपना लिए, मर जाएगा
अमीर-गरीब का अंतर दिनो-दिन बढ़ जाएगा
जीवन की हर शह का, अंदाज बदल जाएगा !!!

लड़के पहनने लगेगे काली में बाली, रख लेंगे एक चुटिया भी काली
लड़कियां बाय कट बाल कटाएंगी, पेंट-शर्ट पहन मैम हो जाएंगी
लड़का-लड़की पहचानना भी मुश्किल हो जाएगा
जीवन की हर शह का, अंदाज बदल जाएगा !!!

कंही भी किसी की भी बजेगी घंटी, होगी अपनी बबली या कोई भी बंटी
कानो मे ब्लू-टूथ, हाथों में मोबाइल होगा
सूचना क्रान्ति युग में इंसान भी मोबाइल हो जाएगा
जीवन की हर शह का, अंदाज बदल जाएगा !!!

चीन सा निकला छोटा सा वाइरस, विश्व पटल पर छा जाएगा
हो अमेरिका, इटली, चीन या भारत, हर देशवासी घबराएगा
विकसित-विकासशील अर्थव्यवस्था का गणित चरमराएगा
जीवन की हर शह का, अंदाज बदल जाएगा !!!

हो शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल-कूद या कोई भी सेवा
लगेगा सब कुछ बस एक धोखा
बिना नेट/वाई-फाई कोई चैन नही पाएगा
व्हाट्सअप्प / गूगल ही जगत गुरु बन जाएगा
जीवन की हर शह का, अंदाज बदल जाएगा !!!

लाड़-प्यार, दुलार , अपनापन हर रिश्ता ध्वस्त हो जाएगा
इन्सानों की तो बात छोड़ो, भगवान-खुदा भी क़ैद हो जाएगा
सामाजिक प्राणी इंसान मास्क लगा दो गज दूरी अपनाएगा
जीवन की हर शह का, अंदाज बदल जाएगा !!!

ये मैंने कब सोचा था, ऐसा भी हो जाएगा
जीवन की हर शह का, अंदाज बदल जाएगा !

कवियित्री:  श्रीमती सोनिया चौहान
(सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी)
भा.कृ.अनु.प.– राष्ट्रीय कृषि आर्थिकी एवम्
नीति अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-12
Email: sonia.chauhan@icar.gov.in

Share to:

Leave a Reply